Kalpeshwar Temple की यात्रा पर कब जायें, कैसे जायें, कितना खर्च होगा?

kalpeshwar temple

kalpeshwar temple in hindi कल्पेश्वर मंदिर भारत के उत्तराखंड के चमोली जिले के सुरम्य उर्गम घाटी में स्थित है। kalpeshwar mandir kahan hai कल्पेश्वर मंदिर पंच केदार मंदिरों में से एक है | जो भगवान शिव जी को समर्पित हैं | यह पांचवां और अंतिम केदार मंदिर माना जाता है। कल्पेश्वर मंदिर भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है। और “कल्पेश्वर” नाम “कल्प” से लिया गया है |

जिसका वास्तविक अर्थ है “इच्छा,” और “ईश्वर,” है | जो भी इस मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के लिए आता है | तो भगवान शिव उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते है।

कल्पेश्वर मंदिर समुद्र तल से करीबन 2,200 मीटर (7,217 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। और मंदिर एक गुफा में स्थित है | मंदिर तक आने के लिए भक्त सुंदर पगडंडियों और जंगलों से होकर जाते है। इस उर्गम घाटी की प्राचीन सुंदरता मंदिर के आध्यात्मिक अनुभव करती है। panch kedar in hindi

कल्पेश्वर मंदिर का इतिहास | History of Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर का इतिहास हिंदू पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों के साथ जुड़ा हुआ है। प्राचीन ग्रंथों और लोककथाओं के अनुसार, मंदिर को महाभारत के युग से जोड़ा जाता हैं। kalpeshwar mandir ki story in hindi

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत में कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद, पांडवों ने युद्ध के दौरान किए गए पापों से खुद को मुक्त होने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेने चाहते थे । तभी भगवान शिव पांडवों से छिपकर केदार घाटी में चले जाते है | और बैल का रूप धारण कर लेते है | लेकिन भीम भगवान शिव को पहचान लेते है |

See also  Almora Hill Station, के दर्शनीय स्थल जहाँ जाकर सबकुछ भूल जाएंगे |

तभी खुद को भूमिगत कर लिया। इसलिए पंच केदार मंदिरों में से प्रत्येक मंदिर भगवान शिव के शरीर के अंगों का प्रतिनिधित्व करता है | जिसमें कल्पेश्वर में उनके बालों (जटा) का प्रतिनिधित्व करते हैं। kalpeshwar mandir in hindi

kalpeshwar temple trek

कल्पेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय | Best Time to Visit Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर का माना जाता है | हालांकि मानसून के बाद भी आप घूमने जा सकते है। क्योंकि इस समय मौसम बेहद सुखद हो जाता है | और आप यात्रा का आनदं ले सकते है | kalpeshwar mandir kab jaye

उत्तराखंड में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी का खतरा रहता है। और भारी बर्फबारी के कारण मौसम मंदिर का रास्ता आमतौर पर दुर्गम होता है। इसलिए, सर्दियों के मौसम में कल्पेश्वर मंदिर जाने से बचने की सलाह दी जाती है | जब तक कि आप एक अनुभवी ट्रेकर नहीं हैं और अत्यधिक ठंड के मौसम की स्थिति के लिए अच्छी तरह से तैयार हैं। kalpeshwar mandir kab khulega

कल्पेश्वर मंदिर के पास में रुकने की जगहें  | Where to Stay in Kalpeshwar Temple

हालाँकि कल्पेश्वर मंदिर उत्तराखंड की सुदूर की उर्गम घाटी में स्थित है | इसलिए मंदिर के पास रुकने का कोई विकल्प नहीं हैं। लेकिन कल्पेश्वर मंदिर के आसपास ठहरने के लिए एक गांव है | मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर (6.2 मील) दूर है। और आप उर्गम में बने कुछ गेस्टहाउस और होमस्टे यह होटल में जा सकते हो | जिसका किरया एक रात का 600 से 1000 के बीच में होता है | यह फिर आप कैम्प में भी रुक सकते है | जो आप से 300 से 600 चार्ज कर सकते है | kalpeshwar mandir kaha ruke

See also  History of Yamunotri Temple Hindi | यमुनोत्री मंदिर में आरती और घूमने का समय

लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है | कि इन क्षेत्रों में रुकने के विकल्प काम हैं | इसलिए विशेष रूप से पीक सीज़न के दौरान होटल पहले से ही बुक कर के चले। और उतना ही सामान लेकर चलें। जिसको लेकर आप कही भी ठहर सके | kalpeshwar temple hotel booking

कल्पेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे | How to Reach Kalpeshwar Temple

वायु मार्ग By Air: कल्पेश्वर मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा उत्तराखंड के देहरादून शहर में स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। हवाई अड्डे के बाहर से आपको कई टैक्सी और बस मिल जाएँगी | जो चमोली या जोशीमठ तक पहुँचाती हैं | फिर आप एक साझा टैक्सी ले सकते हैं | जो मंदिर के लिए आधार उर्गम गांव तक आ सकते है। kalpeshwar to jolly grant distance

ट्रेन मार्ग By Train: कल्पेश्वर मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से, आपको चमोली या जोशीमठ तक पहुँचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं | या फिर साझा टैक्सी लेकर उर्गम गांव तक जा सकते हैं। kalpeshwar temple to railway station distance

सड़क मार्ग By Road: कल्पेश्वर मंदिर आप सड़क मार्ग द्वारा सीधा जा सकते है | जब आपको चमोली या जोशीमठ होते हुऐ हेलंग गांव पहुंचना होगा | फिर हेलंग से, आप उर्गम गांव तक पहुंचने के लिए या तो स्थानीय टैक्सी किराए पर ले सकते हैं | या साझा टैक्सी ले सकते हैं।

कल्पेश्वर मंदिर का ट्रेक: उर्गम गांव से, कल्पेश्वर मंदिर के लिए ट्रेक शुरू होता है। जो लगभग 10 किलोमीटर (6.2 मील) का होता है | और इसको तय काने में लगभग 4-5 घंटे का समय लगता हैं। लेकिन खड़ी चढ़ाई और पथरीले इलाके के साथ पगडंडी मध्यम रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। परंतु आसपास के सुंदर पहाड़, जंगलों और नदियों का दृश्य आपको थकान नहीं होने देगा | kalpeshwar trek timings

See also  Rudranath Temple in Hindi रुद्रनाथ मंदिर के जुड़ी कुछ अनोखी कहनी |

Nearest Places to Visit Kalpeshwar Temple

kalpeshwar temple

कल्पेश्वर मंदिर के आसपास घूमने के लिए कई अन्य खूबसूरत स्थान है। जिन्हें आप आसानी से घूमने सकते हैं

1. उर्गम गाँव (Urgam Village): कल्पेश्वर मंदिर के सबसे पास का गाँव उर्गम गाँव है | जिसे आप घूम सकते है | और यह एक विचित्र और पारंपरिक गांव है | इस गांव में संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता तथा यह लोग अपने आतिथ्यो का स्वगत बड़े गर्मजोशी से करते है।

2. कलगोट गांव (Kalgot Village): उर्गम गाँव से सटा कलगोट गांव है | कलगोट गांव का आकर्षक हिमालयी गांव है। जो अपने सीढ़ीदार खेतों, सेब के बागों और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है। आप गाँव में सैर भी कर सकते हैं | और यह बहुत सूंदर गाँव हैं।

3. आदि बद्री (Adi Badri): कल्पेश्वर मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदि बद्री जो प्राचीन मंदिरों है। और यह भगवान विष्णु को समर्पित 16 मंदिरों का एक समूह है। यह मंदिर उत्तम पत्थर की नक्काशी और सौंदर्य का दर्शता हैं। आदि बद्री हिंदू भक्तों के लिए धार्मिक महत्व रखता है इस लिए हर साल हज़ारो की संख्या में यात्री आते है |

4. जोशीमठ (Joshimath): जोशीमठ से कल्पेश्वर मंदिर लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जोशीमठ बद्रीनाथ सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों के लिए एक आधार केंद्र के रूप में कार्य करता है। जोशीमठ से आप हिमालय की सुंदर चोटियों के दृश्य देखा सकते है | इस शहर में एक प्राचीन नरसिम्हा मंदिर स्थित है | kalpeshwar temple in hindi

5. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान (Nanda Devi National Park): नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में भी शामिल है | और यह कल्पेश्वर मंदिर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है। इस उद्यान में आप विविध वनस्पतियों और जीवों को देख सकते है | जिसमें हिम तेंदुए और हिमालयी कस्तूरी मृग जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। और यह जग़ह प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए स्वर्ग है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like